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Apologists of the juvenile monster Afroz, how do these people face the mirror ?

समाज के लिए जितना बड़ा खतरा अफ़रोज़ जैसे राक्षस हैं, उनके प्रति संवेदना रखनेवालों को भी उतना ही बड़ा खतरा समझा जाना चाहिए। ये लोग इस बात को सुनिश्चित कर रहे हैं कि एक दुर्दांत बलात्कारी का खुलेआम घूमना बड़ी ही सामान्य सी बात है। इन सबको पूर्ण विश्वास है कि वो राक्षस अब मनुष्य बन चुका है, पेंटिंग बनाने लगा है, अपने किये पर पछतावा है उसे। देश विदेश से अनेक उदाहरण दिए जा रहे हैं , बरखा दत्त बता रही हैं कि कैसे एक किशोर ने पंद्रह साल की उम्र में एक व्यक्ति को चाक़ू मार दिया था, आज वो पूरी तरह सुधर चुका है। “India’s Daughter” नामक डाक्यूमेंट्री बनाकर एक मासूम लड़की के रेप को सरे बाज़ार बेचनेवाली और समूचे भारतीय पुरुष वर्ग को उत्पीड़क और संकीर्ण मानसिकता वाला बतानेवाली लेकिन बड़ी सफाई से उस क्रूर रेपिस्ट की पहचान छिपा लेने वाली लेस्ली उडविन बता रही हैं कि अफ़रोज़ को “Monster” कहना सही नहीं होगा, वो बहुत गरीब घर से आया लड़का है, गलत संगत में पड़ गया है, ये समाज का दायित्व है उन्हें सुधारना। भारतीय समाज एक 20 साल के युवक के रक्त के लिए इतना क्यों उतावला है। समाज उतावला नहीं है मोहतरमा, वो अपनी बेटी के बीन्धे हुए शरीर का प्रतिशोध चाहता है। वो एक सन्देश चाहता है कि बस बहुत हुआ, “No more tolerance, this is the limit” . आप इसे सातवीं सदी की बर्बरता कह के अपना पिंड छुड़ा लें लेकिन इसका क्रोध यूँ ही नहीं है।  कई बार बड़ा अचरज होता है आप लोग आईने में अपनी शकल कैसे देख पाते होंगे, बड़े हिम्मतवाले हैं। आपका ये कुतर्क कि उस लड़की और उसके दोस्त को खून से लथपथ देखकर भी गाडी ना रोकनेवाले लोग भी तो गुनहगार हैं, निश्चित रूप से हैं लेकिन ये बात किसी भी प्रकार से असली अपराधी को अपराधमुक्त नहीं करती।

आपका तर्क है “Justice should be reformative not retributive” मतलब न्याय सुधार के लिए होना चाहिए, प्रतिशोध के लिए नहीं”। ये कोई सार्वभौमिक सिद्धांत नहीं है, रेपिस्ट को तो आप कथित तौर पर सुधार देंगे लेकिन इससे पीड़ित को क्या प्राप्त होगा, उसे तो न्याय नहीं मिला। उसे न्याय दिलाने के नाम पर आप TRP एन्जॉय करेंगे, कैंडल जलाएंगे, पांच पांच रुपये के SMS में लोगों की राय मांगकर कमाएंगे, लेकिन समर्थन करेंगे बलात्कारी पर नरमी बरतने का। जो एक मासूम लड़की के गुप्तांगों में रॉड डालकर “मर साली मर” कह रहा है, उसके लिए मानवता की दुहाई, सभ्यता की दुहाई देना कितने हद दर्जे की निर्लज़्ज़ता है।

निश्चित रूप से कानून की कमजोरियों का लाभ मिल गया आपके प्रिय को क्योंकि कानून बनाने वालों को शायद इस बात का अंदाजा  नहीं रहा होगा कि कोई जुवेनाइल इतना क्रूर हो सकता है, इतने दानवीय कृत्य कर सकता है। पर उस लड़की ने कानून की कमियों के साथ साथ आप लोगों का निर्लज़्ज़ चेहरा भी सामने ला दिया है। समाज को चाहिए कि सफ़ेद कॉलर में अपने बीच बैठे नीच लोगों को पहचाने, ये जहां जाएँ लोग इनपर थूकें। अफ़रोज़ मृत्यदंड से
कम कुछ भी डिज़र्व नहीं करता और ये नीच भी पूर्ण रूप से सभ्य समाज से निष्कासित बहिष्कृत किये जाना ही डिज़र्व करते हैं। ये लोग फिर किसी लड़की की इज़्ज़त बेचने आएँगे, कैंडल जलाएंगे, झूठा गुस्सा दिखाएंगे और बाद में “Reformative Justice” का रोना रोएंगे।

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Frustrated by “Auntie police bula legi” song, Auntie calls police, Kejriwal claims, Modi-Jaitley are scared.

“आंटी पुलिस बुला लेगी पर पार्टी यूँ ही चाल्लेगी” पर हुड़दंग करने पर आंटी ने सच में बुला ली पुलिस, केजरीवाल बोले, डरे हुए हैं मोदी-जेटली।”

कल कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में DDCA खुलासा सुनने और आईटी सेल में बैठकर दिनभर ट्रेंड चलाने के बाद थके हारे आपटार्ड क्रांतिलाल भूरा, नकद नारायण एंड थ्री अदर्स जब अपने किराये के कमरे में पहुंचे, तो उन्हें ड्रिंक्स की जबरदस्त आवश्यकता महसूस हुई, सौभाग्य था कि पिछले हफ्ते आशु जी के घर से लाए हुए ओल्ड मोंक के दो क्वार्टर पड़े हुए थे, जैसे तैसे पानी के साथ काम चलाया गया, मदिरापान के बाद पांच में से तीन क्रांतिकारियों को अचानक नृत्य की भी तीव्र आवश्यकता महसूस होने लगी, तीनों ने एक इंटरनल सर्वे करके नृत्य के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया और फुल साउंड में श्री हनी सिंह के गाने चलाकर विशेष क्रांतिकारी अंदाज़ में नृत्य करना और हुल्लड़ मचाना शुरू कर दिया, रात के दो बजे थे, शोर सुनकर जल्दी सो जानेवाले आस पास के सैलरी के लालची ऑफिसगामी भ्रस्ट लोग जाग गए और क्रान्तिकारियों की इस हरकत का निर्लज्ज़ता से विरोध करना प्रारम्भ कर दिया, पर क्रांतिकारी भी युगपुरुष वाली मिट्टी से ही बने हैं, वो भी मोदी जी के इन टटपूंजियों से कहाँ डरने वाले थे, एक ने “आंटी पुलिस बुला लेगी पर पार्टी यूँ ही चाल्लेगी” “** में दम है तो बंद करवा लो” जैसी साहित्यिक संगीतमय कृतियाँ उद्धृत करनी शुरू कर दीं।

लेकिन ये क्या आंटी ने चैलेन्ज स्वीकार कर लिया, जी हाँ, मकान मालकिन आंटी प्रमिला शर्मा ने तत्काल सौ नंबर डायल करके मोदी की भ्रष्ट दिल्ली पुलिस को बुला लिया। पुलिस देखकर पांचो युवा क्रांतिकारियों की चोक ले गई, सबने एक दूसरे पर इल्ज़ाम लगाने शुरू कर दिए, “मैं नहीं सर, ये बजा रहा था गाने”, “मैं तो बच्चा हूँ सर, दारु ये **** पीते हैं”, “मैं तो केवल भजन सुनता हूँ सर”, एक क्रांतिकारी ने तो कह दिया, “सर इन **** ने जबरदस्ती खींच कर नचा दिया”, ये बात सुनते ही बाकी चारों ने इस क्रांतिकारी को पीट दिया, “युगपुरुष सर की नक़ल कर रहा है बे”।

माफ़ी वाफी मंगवाने के बाद पुलिस ने पांचो को गाडी में बिठाकर करीब पांच किलोमीटर दूर ले जाकर दो दो कंटाप देकर छोड़ दिया। जहां से पैदल आना पड़ा।

सुबह जब मुख्यमंत्री बिन पोर्टफोलियो श्री युगपुरुष सर को ये बात पता चली तो वे आग बबूला हो गए, तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलायी और प्रधानमंत्री मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली को गालियां देना शुरू कर दिया, कहा कि कल रातें मैंने लड़को की मिसकॉल देखी थी, पर मैं “दिलवाले” का रिव्यू लिखने में व्यस्त था, इसलिए कॉल बेक नहीं कर पाया। सीबीआई वालों के डर से मैंने दफ्तर की फाइलें अपने क्रांतिकारियों के कमरों में रखवा दी थीं, पर मोदी के ठुल्ले वहाँ भी पहुँच गए। मैं दूसरी मिट्टी से बना हूँ, इन गीदड़भभकियों से डरनेवाला नहीं हूँ। उन्हें पता नहीं है, इसी वजह से मैंने CM की कुर्सी पर बैठकर भी खुद को बेरोजगार रखा हुआ है, एक भी पोर्टफोलियो नहीं रखा, ताकि खुलासों के लिए टाइम निकाल सकूं, जेटली डरे हुए हैं मेरे खुलासे से, उनके ठुल्ले डरे हुइ हैं, उनका खानदान डरा हुआ है, उनके ननिहाल के लोग डरे है हैं, सब डरे हुए हैं”

इसके बाद उन्होंने ज़ूम टीवी और तरन आदर्श के “दिलवाले” से सम्बंधित सवालों के जवाब दिए, रोहित शेट्टी को स्टीवेन स्पिलबर्ग और क्रिस्टोफर नोलन के टक्कर का डायरेक्टर बताया और ट्वीट करने चले गए।

– इंस्पेक्टर भगजुगनी की विशेष रिपोर्ट

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EC issues show cause notice to 22 Channels including Discovery, Net Geo, Star Plus and Star Sports for not conducting exit poll on Bihar assembly elections.

“बिहार चुनाव के एग्जिट पोल सर्वे न दिखाने पर चुनाव आयोग ने जारी किया स्टार प्लस, स्टार स्पोर्ट्स, डिस्कवरी, नैशनल जीओग्राफिक समेत बाइस चैनलों को “कारण बताओ नोटिस”–

पटना- कल बिहार विधानसभा चुनावों के पांचवें चरण का मतदान सम्पन्न होते ही तमाम राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, शहरीय, कस्बीय एवं मोहल्लीय न्यूज चैनलों ने अपने अपने एग्जिट पोल के माध्यम से दर्शकों पर एकतरफा हमला बोल दिया. लगभग हर न्यूज चैनल ने अपना अपना अनुमान बताया, कई चुनाव विश्लेषकों ने तो केंद्रीय राजधानी दिल्ली के करोलबाग और लाजपत नगर में दिवाली की शॉपिंग करते करते किए गए सर्वे में बिहार चुनाव में दोनों पक्षों को सुविधानुसार सौ सवा सौ सीटें मिलने का दावा किया । हालांकि ये उनकी कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण माना जाना चाहिए कि घटनास्थल पर शारीरिक रुप से उपस्थित ना होते हुए भी उन्होंने शाब्दिक उपस्थिति दर्ज कराई. एक ओर ये कर्तव्यनिष्ठ लोग थे और दूसरी ओर कुछ ऐसे अकर्मण्य चैनल भी थे जो इस महान घटनाक्रम की उपेक्षा करते हुए जंगली जानवरों, समुद्री यात्राओं, ससुराल सिमर का, संध्या बिंदनीं, कुमकुम भाग्य, भारत- दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज
इत्यादि मेँ समय व्यर्थ करते रहे. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के इतने बड़े त्यौहार के इस प्रकार हुए अपमान का चुनाव आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने डिस्कवरी, स्टार स्पोर्ट्स, नैशनल जिओग्राफिक, कलर्स, एंड टीवी समेत बाइस चैनलों को कारण बताओ नोटिस भेजा है.


आयोग की प्रेस कांफ्रेँस मेँ इस अलोकतांत्रिक और गैरजिम्मेदराना रवैये की कड़े शब्दों में निँदा के साथ साथ स्पष्ट किया गया कि नोटिस का जवाब न देने पर लाइसेंस कैंसिल होने से लेकर अहिष्णुता के खिलाफ आदर्श लिबरलों की रुटीन क्रियाओं (पुरस्कार वापसी की धमकी, ट्वीट, मोदी-मजम्मत) का सीधा प्रसारण और अफ्रीका के तमाम देशों के आम चुनावों के प्री पोल और एग्जिट पोल सर्वे दिखाने की सजा हो सकती है । आरोपी चैनलों के मालिक सदमे में हैं, उन्होंने आयोग के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में दायर की गई याचिका में कहा कि उपरोक्त अमानवीय सजा वाले क्लॉज को हटाया जाए, भले ही छ: महीने के सश्रम कारावास या पांच सौ करोड़ की पेनाल्टी लगा दी जाए. याचिका पर दो महीने बाद सुनवाई होगी.

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Two Hindu boys caught eating communal Samosa on the pages of an eminent Muslim writer’s book. Is intolerance rising under Modi ?

“लड़के को अपनी लिखी किताब के पन्ने पर समोसा कचौड़ी खाते देख मशहूर लेखक का पारा चढ़ा, लगाया प्रधानमंत्री पर असहिष्णुता को बढ़ावा देने का आरोप”


“केन्द्रीय राजधानी दिल्ली के बाराखंबा रोड इलाके से चौंकानेवाली खबर आई है, 30 वर्ष पूर्व अपनी कानपुरी रचना “मैँ तेरो कटप्पो” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित मशहूर कवि/लेखक श्री “जलील कमीनपुरी” ने अपना पुरस्कार लौटा देने की खुली धमकी दी. वारदात कुछ ऐसी रही कि लेखक “जलील कमीनपुरी” एक ढ़ाबे पर बैठे चाय और बड़ी गोल्डफ्लेक का अवशोषण कर रहे थे, तभी उनकी नजर पास की बेंच पर बैठे दो लड़कों पर गई, जो समोसा कचौड़ी खा रहे थे, कमीनपुरी साहब ने जब गौर फरमाया तब उन्हें यह इल्म हुआ कि समोसे की प्लेट में तेल सोखने के लिए जो पन्ना रखा था, वो इनकी पुरस्कृत रचना “मैँ तेरो कटप्पो” से फाड़ा हुआ था. लेखक महोदय आगबबूला हो उठे, लड़के का कालर पकड़ लिए, कहे — “ससुरो अनपढ़, ऐसी ऐतिहासिक किताब पर तू कचौड़ी समोसा खा रौ है, दुई अच्छर की सरम ना है ससुरौ, इत्ते महान लेखक को ऐसो अपमान करेगो ?”


लड़का था गबरु जवान, सो उसने एक बार में चर्रर्र की ध्वनि के साथ लेखक जी का कुरता पोंछे में बदल दिया, कहा कि — ससुरौ तुमरी किताब है तो एहकी बत्ती बनाए अपने पास रक्खो, ऐसे काहे छोड़ रखी है, अभी हम खाते खाते दुई लाइन पढ़ गए, ततैया नाच गई आंखन के आगे, कूढ़ मगज. ना सिर ना पैर, तोसे अच्छी कविता तो अंगूरी भाभी करती हैँ (“सही पकड़े हैं” वाली).. और का कहे इ पुरस्कृत कविता है, दुबारा बोल दिए अबकी चप्पल उतार के चटचटा देँगे”


चश्मदीद गवाहों के मुताबिक इसके बाद लेखक महोदय बिल्कुल “डोंट नो वाट टू डू” वाली मुद्रा में आ गए, उन्हें तत्काल इंटॉलरेंस का दौरा पड़ गया और फिर वे दो चार तरह की अलग अलग आवाजों में रोना शुरु हो गए– बोले कि ये वो देश नहीं है जहां मैं बड़ा हुआ था, पहले भी लोगों की घटिया रचनाओं को अवार्ड मिले हैं लेकिन कभी उनपर समोसा रखकर नहीं खाया गया, ये बहुत ही अपमानजनक है, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार है, एक तो ये सांप्रदायिक हिन्दु सरकार हमारी घटिया रचनाएं पुरस्कृत नहीं कर सकती और दूसरी ओर उनपर लोगों को समोसा कचौड़ी बंटवा रही है, अगर ये लोग ऐसा सोचते हैं कि हम इस भय से घटिया किताबें लिखना बंद कर देंगें कि बाद में उनका प्रयोग नाश्ता परोसने के लिए होगा तो वे गलत हैं. लिबरल समाज उन्हें कभी माफ नहीं करेगा, तौबा तौबा कितनी इंटॉलरेंस बढ़ गई है इस देश में, अगर दुबारा मैंने अपनी किताब का ऐसा अपमान देखा तो मैँ अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दूंगा”


तमाम घटना का वर्णन मशहूर न्यूज चैनल एनडीटीवी ने कुछ इस तरह किया, “Two hindu goons caught eating communal Samosa on the pages of an eminent Muslim writer’s book. Is intolerance rising under Modi ? Is secular fabric being destroyed ? Will the PM now take responsibility and give a detailed statement on the whole issue and seek an unconditional apology”


प्रधानमंत्री ने अभी तक कोई रिप्लाई नहीं दिया है ना ही उनके कार्यालय से लेखक जलील कमीनपुरी और एनडीटीवी को कोई आश्वासन मिला है कि आरोपी पर कार्रवाई होगी ..

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“Slapped over backward point for four”

Sehwag

दस बजने को हैं, स्कूल जाने का वक़्त हो चुका है, दूरदर्शन पर एक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच का प्रसारण चल रहा है, कप्तान सौरभ गांगुली ने टॉस जीत कर बल्लेबाजी का फैसला किया है… अब चूँकि स्कूल घर से दो मिनट की दूरी पर था, (दूरी ऐसे ही नापते हैं)…… दौड़ लगाई जाए तो एक मिनट से भी कम समय का रास्ता…….. हम लड़के जूता मोजा टाई बेल्ट कस के स्कूल जाने को तैयार बैठे हैं, लेकिन जगह से हिल नहीं रहे…. मिनट की सुई 11 पर आ चुकी है, रसोई से आवाज़ आ रही है, “आज इस्कूल नइखे जाए के का हो लईकन”…. हमारे मन से भी यही निकलता कि हाँ आज तो ईहे मूड है, फिर रसोई से आवाज़ आती, “भागअ जल्दी नाही तअ पीटईबअ अब.” इस बार टीवी से आवाज़ आती, “Slapped over backward point for four”…. और हम कहते, “मम्मी बस सेहवाग के बैटिंग देख के चल जाईब.”


बचपन की अनेक यादों में “सेहवाग के बैटिंग देख के चल जाईब.” का अपना एक अलग स्थान है. नयी पीढ़ी को उसके स्टार मिलेंगे, लेकिन वीरेन्द्र सेहवाग कोई नहीं होगा. पिच की तुम्हारे साथ पता नहीं क्या सेटिंग थी, जो पिच तुम्हारी बैटिंग के वक़्त “फ्लैट ट्रैक” हुआ करती थी वहीँ तुम्हारे आउट होते ही स्विंग, सीम, बाउंस, टर्न सब कुछ मिलने लगता था गेंदबाज को…. अपनी किताब लिखना तो रुर बताना ये कैसे होता था और हाँ किताब का टाइटल “See ball hit ball” रखना…..
‪#‎ThankYouSehwag‬

…. Happy Birthday and all the best for the future.

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“ISIS wants Indian Liberals as spokespersons who can convince the world that killings done by ISIS have nothing to do with the people who have been killed”

“ISIS ने जारी की प्रेस रिलीज़, जताई भारतीय लिबरलों को संगठन का प्रवक्ता बनाने की इच्छा”

कुख्यात सेक्युलर संगठन “ISIS” ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके चुनिंदा भारतीय लिबरल पत्रकारों और इतिहासकारों को अपना प्रवक्ता बनाने की इच्छा व्यक्त की है, संगठन ने एक वीडियो भी रिलीज़ किया है जिसमें उन तमाम कारणों को परिलक्षित किया गया है जिनके चलते भारतीय लिबरल इस महत्वपूर्ण ओहदे के लिए खलीफा बगदादी की पहली पसंद बनने में कामयाब रहे. हाल के दिनों में भारतीय लिबरल पत्रकारों के सेकुलरिज्म के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन की गूँज अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई पड़ रही है.

वीडियो में दिखा कि खलीफा अबू बकर बगदादी (हिज हाइनेस) मरहूम बादशाह औरंगजेब और दादरी वाले मुद्दे पर की गई लिबरल रिपोर्टिंग देखकर इतने उत्साहित हुए कि उन्होंने महज एक महीने में विश्व इतिहास के एकमात्र दंगे पर पिछले 13 साल में हुए लगभग 17 लाख कार्यक्रम देख डाले. जिसमे से पौने आठ लाख तो सिर्फ खलीफा जी के पर्सनल फेवरेट श्री राजदीप सरदेसाई के थे. इससे उनकी इच्छा और बलवती हुई. याकूब मामले में भी उन्होंने कुछ चुनिंदा लिबरलों की तहे दिल से प्रशंसा की. तमाम चर्चा के बीच वो कई बार भावुक भी हुए उन्होंने कहा कि जिस तन्मयता से लिबरल समुदाय ने “हज़ारों मंदिरों को तोड़कर उनका रिकंस्ट्रक्शन करके उन्हें सेक्युलर उपासना स्थल में परिवर्तित कर उनका उद्धार करनेवाले व लाखों मोक्षपिपासु नन- सेक्युलरों को जीवन से मुक्ति देकर शिल्पकला और मानवता के प्रति अपने अभूतपूर्व प्रेम का परिचय देने वाले” मरहूम बादशाह औरंगजेब (आलमगीर) को महिमामंडित किया वो वाकई काबिल ए तारीफ़ था. कुछ ऐसे ही निर्माण कार्य हमारा संगठन ISIS भी संपन्न कर रहा है, चाहे वो यजीदी लड़कियों की सरेआम मंडी लगाकर नीलामी हो या दो ढाई हज़ार साल पुरानी ज़र्ज़र चर्चों को ध्वस्त करना हो. हिंदी के एक साम्प्रदायिक कवि सुमित्रानंदन पन्त ने भी कहा है- “वृक्षों के जीर्ण शीर्ण पात केवल इसलिए गिरते हैं ताकि वनों में फिर से वसंत आ सके.” हम सब कुछ मिटाकर पुनर्निर्माण के सिद्धांत में विश्वास करनेवाले लोग हैं.

खलीफा भी यही चाहते हैं कि उनका महिमामंडन भी कुछ इसी तरह से किया जाए. इराक और सीरिया में इतिहास की किताबें कुछ इस तरह लिखी जाएँ ताकि यजीदियों और कुर्दों की भविष्य की पीढ़ियों (यदि वो जीवित बच गए तो) के मन में खलीफा जी की छवि एक हीरो की बने. जिसने उनके बीच फैले जातिवाद को ख़त्म किया और भाईचारे की सिवैयां बांटी. इस पवित्र कार्य के लिए खलीफा जी ने भारत में इतिहासकार माने जाने वाले प्रो. इरफ़ान हबीब और श्रीमती रोमिला थापर को शॉर्टलिस्ट किया है. मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा का चयन भी लगभग तय माना जा रहा था पर वो बेहद बारीक अंतर से पीछे रह गए. खैर उनके करीबी लोगों का मानना है कि वे हार मानने वालों में से नहीं हैं, आने वाले समय में और भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे और खलीफा जी के दिल में जगह बनाएंगे.

दादरी घटना में लिबरल समुदाय के रवैये से भी खलीफा काफी संतुष्ट दिखे, “नारा ए तकबीर” के साथ एक यजीदी कैदी की गर्दन रेतते हुए उन्होंने स्पष्ट किया दुनिया के 99.99 प्रतिशत आतंकवादियों का कोई मजहब नहीं होता. उन्होंने बताया कि दादरी से पहले भारत में किसी हत्या की खबर तब सुनी थी जब वो ढाई साल पहले प्रतापगढ़ के कुंडा से आई थी. खलीफा बगदादी ने भारतीय लिबरल पत्रकारों को विश्व स्तरीय स्पिनर की संज्ञा देते हुए बताया कि शेन वार्न और मुथैया मुरलीधरन भी इस हद तक गेंद को स्पिन नहीं करा पाते थे. जितनी भारतीय लिबरल ख़बरों को कराते हैं. हमारे संगठन की आवश्यकता भी यही है, हम चाहते हैं कि जब भी हम जनसंख्या नियंत्रण के लिए हज़ार दो हज़ार लोगों को उड़ायें तब यह कहा जाए कि इन हत्याओं का मरने वाले लोगों से कोई सम्बन्ध नहीं है, गोली को बन्दूक से ना जोड़ा जाए.

खलीफा ने कहा कि ये इच्छा पिछले कई महीनों से उनके दिमाग में थी लेकिन कुछ अति सेक्युलर गतिविधियों में घोर व्यस्तता के चलते वे टालमटोल करते रहे. लेकिन हाल के दिनों में यहूदी और हिन्दू साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा फैलाए जा रहे कुप्रचार के चलते अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की बहुत बदनामी हुई है, लोग ये नहीं समझ रहे कि जनसँख्या नियंत्रण जैसे वैश्विक महत्व के विषय पर संगठन ने जिस तत्परता से कार्य किया है उसके त्वरित परिणाम देखने को मिले हैं. (यदि अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी का सहयोग प्राप्त हो तो ये कार्य और भी तेजी से संपन्न किया जा सकता है.) आशा है कि हमारी नयी प्रचार टीम हमारी छवि बदलने में कामयाब होगी. उनसे पूछा गया कि जब राजदीप जी का चयन हो गया तो बरखा जी और सागरिका जी की अनदेखी क्यूँ की गयी. खलीफा जी का जवाब काफी संतोषजनक रहा, उन्होंने कहा, “देखिये ऐसा है कि कहीं ना कहीं बरखा जी की कंसल्टेंसी फीस बहुत अधिक थी और 14 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगने के बाद तो वो हमारे बजट के बिलकुल बाहर थी. जहां तक सागरिका जी का सवाल है, हमें लगता है कि अभी उन्हें और मेहनत करनी होगी. राणा अयूब से लगातार रीट्वीट पाने को अगर वो योग्यता समझती हैं तो फिर भूल जाएँ कि उनका चयन कभी इस अंतर्राष्ट्रीय स्तर की टीम में होगा.” खलीफा के इस बम्पर ऑफर के बाद लिबरल बिरादरी में जबरदस्त भसड मची हुई है. कोई किसी की टांग खींच रहा है, कोई किसी की दाढ़ी नोच रहा है, कोई किसी का JNU वाला झोला छीनने में लगा है. लिबरल टाइम्स के लिए इंस्पेक्टर भगजुगनी की विशेष रिपोर्ट.

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Narendra Modi, may not be a hero, but a silent guardian, a watchful protector, a dark knight.

“The Dark Knight”

“Gotham City”….. “बैटमैन” का शहर”….. कभी अंडरवर्ल्ड और माफिया धडल्ले से अपना कारोबार चलाया करते थे यहाँ. पुलिस, क़ानून इन चीज़ों का उनके लिए कोई मतलब नहीं था. लेकिन अब स्थिति बदली सी लगने लगी थी, रात के अँधेरे में निकलने वाले अपराधी अब भयभीत थे. किसी अनचाही सी चीज़ की एंट्री हुई थी शहर में, उनके “अच्छे दिनों” पर बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा था, वे किसी भी प्रकार से इस “अनचाही चीज़” से छुटकारा पाना चाह रहे थे, फिल्म (डार्क नाईट) का एक बड़ा मशहूर सीन है…. माफिया की मीटिंग चल रही है, विचार विमर्श जोरों पर है, कोई भी चीज़ आजमाने को तैयार हैं. तभी एंट्री होती है “जोकर” यानी मेन विलेन की.

जोकर कह रहा है– “Let’s wind the clock back a year, these cops and lawyers wouldn’t dare cross any of you, what happened (now), did your ‘balls’ drop off ? I know why you chose to have your little group therapy sessions in broad daylight, I know why you are scared to go out at night—— “The Batman”………….. Batman has shown Gotham your true colours unfortunately.”

माफिया — What do you propose ?

जोकर– Its simple we kill the batman.

अब इस पूरी बात को भारत के वर्तमान राजनीतिक सिनारियो में रखकर सोचिये… एक तरफ नरेन्द्र मोदी हैं. दूसरी तरफ उनके तमाम शत्रु (जो जान लेने का प्रयास भी नहीं चूकेंगे.) कुछ मिशनरी द्वारा पोषित, कुछ “पेट्रोल” द्वारा, कुछ ऐसे भी जिन्हें उस जगह चोट पहुंची है, जहां सबसे ज्यादा दर्द होता है, “वॉलेट पर”… बैटमैन की राह आसान नहीं है, इसकी एंट्री भी बहुत मुश्किल दौर में हुई है… लेकिन Gotham शहर को उस पर विश्वास है कि चाहे कुछ भी हो जाए, ये कभी धोखा नहीं देगा. Gotham के अलावा बैटमैन का अलग से कोई परिवार नहीं है. उसे लोगों का भरोसा चाहिए… कुछ मौकों पर वो नाकाम भी होगा.. “Because he is not a hero…… He is a silent guardian…. A watchful protector….. A Dark Knight.

“Happy Birthday NaMo”