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Government decides to subsidize burnol, Adarsh Liberal calls the PM a “Burnol Agent”.

प्रधानमंत्री ने की “Burnol” पर सब्सिडी देने की घोषणा, आदर्श लिबरल समुदाय ने बताया बर्नोल का एजेंट, सरकार ने कहा इन्क्लूसिव राजनीति.”

समाज में सभी वर्गों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए “सबका साथ सबका विकास” के एजेंडे के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लांच की एक बम्पर योजना, ताजा समाचारों के अनुसार भारत सरकार “जलन-तपन- सुलगन” इत्यादि में राहत देने वाली क्रीम बर्नोल पर सब्सिडी देने जा रही है, “डायरेक्ट बेनिफिट्स ट्रान्सफर (DBT)” वाली नीति के तहत गैस सब्सिडी की तरह ये पैसा भी सीधा जन धन अकाउंट में आएगा, जी हाँ कोई रेवेन्यू लीकेज नहीं. इतना ही नहीं सरकार की योजना है की अगले बजट में Burnol के शेयर में 20000 रुपये तक इन्वेस्ट करने पर इनकम टैक्स में Section 80C के तहत डिडक्शन मिलेगी, यानी की इस रकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

सरकार ने यह योजना लांच तो की थी लिबरल समुदाय को राहत देने के लिए, जिनकी जेब पर हर महीने “Burnol” पर बढ़ते खर्च की मार पड़ रही थी, लेकिन हुआ उल्टा, राहत मिलने की जगह जलन और सुलगन बढ़ गई, कई लिबरल मोहल्लों में धुआं उठता दिखाई दिया, अमेरिकी संसद में प्रधानमंत्री के अभूतपूर्व स्वागत और उनके भाषण के दौरान बार बार मिल रही स्टैंडिंग ओवेशन से पहले से ही भरे बैठे लिबरल समुदाय ने इस चिढ़ाने वाली योजना के लिए पीएम पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें बर्नोल का एजेंट करार दिया, चार लोगों के विशाल जनसैलाब को संबोधित करते हुए वरिष्ठ आदर्श लिबरल रवीश मोतिहारवी ने काली स्क्रीन की कसम खाकर कहा कि अपने विदेशी दौरों और भाषणों में प्रधानमंत्री मोदी स्पष्ट रूप से हम लोगों की सुलगाते  नज़र आते हैं, बताइये हर बार साम्प्रदायिकता की शिकायत करने हम लोग जहां पहुँचते हैं,उस देश को भी खरीद लिया, हमारे 65 भाई लोगों ने गुलाबी कागज़ पे जो मोहब्बत का पैगाम ओबामा जी के नाम भेजा था, उसकी भी परवाह नहीं की, आखिरकार हम कहाँ तक झेलें, अब ये स्पष्ट हो गया है कि ये सरकार ठंडक देने की नहीं सुलगाने की राजनीति कर रही है. मोदी जी की इस यात्रा से डोनाल्ड ट्रम्प जैसे लोगों को और बल मिलेगा और हमलोगों की रही सही उम्मीद भी जाती रहेगी.

तमाम राजनीतिक दलों ने भी एक स्वर में सरकार की इस योजना की भर्त्सना की है, राज्यसभा का आधा समय अकेले खा जाने के लिए कुख्यात लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी ने इसे पूंजीपतियों के इशारे पर किया गया काम बताया, उन्होंने ये भी कहा की प्रधानमंत्री ने खुद बर्नोल के शेयर में पैसे लगा रखे हैं, ये साफ़ साफ़ “Conflict of Interest” का केस है.

आजकल गाहे बगाहे हर बात में फिंगरिंग करने की बुरी आदत से ग्रस्त किशोर नेता और कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गाँधी ने “हर किसी के फटे में टांग दो योजना” के तहत सरकार पर हमला बोलते हुए इसे “अल्लम गल्लम मलहम” की सरकार बताया, और प्रधानमंत्री से जवाब माँगा, लेकिन तभी पास से गुजरतीं मम्मी को देखकर वे अचानक दूसरी ओर निकल गए.

ध्रुवीकरण की साज़िश को दूर से ही सूंघकर पता कर लेने की क्षमता से लैस चिरांडू प्रतिभा के धनी “कभी टोपी कभी तिलक फेम” बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश “चन्दन” कुमार ने इसपर सबसे जबरदस्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री यहाँ बर्नोल पर सब्सिडी देकर लोकलुभावन राजनीति कर रहे हैं और दूसरी ओर एक परम सेक्युलर देश में एकता और अखंडता को तोड़ रहे हैं, बिहार में वोटों का ध्रुवीकरण करने की इस चाल को मैं खूब समझता हूँ, क्या वो मंदिर के साथ साथ मस्जिद के लिए जमीन नहीं मांग सकते थे, बिहार की जनता सब देख रही है”… ये बयान इतना जोरदार रहा कि बगल में बैठे भुजंग प्रसाद भी चन्दन कुमार की ओर आपत्तिजनक इशारा करते हुए ठठाकर हंसने लगे.

दिल्ली सचिवालय के एक बंद कमरे से “मेरे पंद्रह लाख कहाँ हैं, मेरे पंद्रह लाख” की आवाज़ें सुनाई दीं तो वहीं हैदराबाद  के एक पब्लिक टॉयलेट से आवाज़ आती रही, बस पंद्रह मिनट के लिए सारे टीवी चैनल बंद कर दो…..

— “इन्स्पेक्टर भगजुगनी की विशेष रिपोर्ट”

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