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The little man has hit the big fella for six.. what a player.. what a wonderful player.

आज भी क्रिकेट वीडियो फोल्डर से गुज़रते वक़्त जब टोनी ग्रेग की ये आवाज़ कानों में जाती है, तो याद आता है शारजाह, सचिन, रेतीला तूफ़ान और अपना ब्लैक एंड वाइट टीवी..

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सवा पांच साल ही उम्र थी उस समय अपनी, क्रिकेट देखना शुरू ही किया था, सचिन के चार बेहतरीन साल 1994 से 1997 बाद में यू ट्यूब पर छोटे छोटे वीडियोज के रूप में ही देख पाया. क्रिकेट की सनक ऐसी कि घर में खिड़की, दरवाज़े या लकड़ी काठी का कोई भी काम लगा हो, अपने लिए एक बैट तो बनेगा ही, घर आये मेहमान वापस जाते वक़्त कोई नोट थमा देते और मम्मी TDS काटने के बाद उसमें से जो भी अमाउंट हमें दे देतीं, उससे MRF स्टीकर ही आता था. बचपन के काफी सालों तक MRF को बल्ला बनाने वाली कम्पनी ही समझता रहा.

हालांकि TV तो कभी बंद नहीं किया तुम्हारे आउट होने के बाद जैसा बहुत लोग क्लेम करते रहे हैं, इसको ब्लेसफेमी ना समझा जाए, क्योंकि फैन होने का वही एक क्राइटेरिया नहीं है, हमने भी बैक फुट पंच और स्ट्रेट ड्राइव लगाने की बहुत प्रैक्टिस की है।

चैंपियन गेंदबाजों के फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन पर जितना अत्याचार तुमने किया है 90 के दशक में वही जानते हैं। उस समय फैशन नहीं था, वरना कई मैन ऑफ द मैच अवार्ड लौटाए गए होते इस तानाशाही बैटिंग के विरोध में,  जहां तक वन डे क्रिकेट की बात है ठीक से दाढ़ी मूंछ भी नहीं आई होगी तब से तुम टीम में गार्जीयन की तरह खेलने लगे थे।

2003 में भी कोई उम्मीद नहीं थी वर्ल्ड कप की, हम बस यही चाहते थे कि पाकिस्तान से जीत जाएँ किसी तरह, बाकी कोई गल नहीं, सुपर स्पोर्ट्स पार्क (सेंचुरियन) में पाकिस्तान का मंचूरियन बना डाला तुमने, वसीम अकरम के सामने सेहवाग की बजाये खुद पहली बॉल पे स्ट्राइक लेना, शोएब अख्तर का “तोहफा” कबूल करना, अब्दुल रज्जाक को वसीम अकरम से ज्ञान दिलवाना कि उसने किसका कैच छोड़ा है और आने वाले ओवरों में  “मौका मौका” वाले ऐड के लिए भरपूर इंतज़ाम कर देना याद रहेगा. इस वर्ल्ड कप में तुम्हारी बैटिंग ने अपना 1996 का वर्ल्ड कप ना देख पाने का मलाल दूर कर दिया.

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आलोचकों का तो पता नहीं पर 2005-06 में हमें भी एकाध बार डर लगा कि तुम्हारा टाइम आ गया है, पर बाद में गलत साबित होने पर बहुत ख़ुशी हुई… 2009 में हैदराबाद में ऑस्ट्रेलिया के साढ़े तीन सौ का पीछा करते हुए 175 रन की पारी देखकर 1998 का शारजाह याद आ गया था। हैदराबाद में भी लगभग जीता ही दिया था तुमने। अगले साल 24 फ़रवरी को रवि शास्त्री की बोली गई ये लाइन “First man on the planet to reach 200 and its the Superman from India” भी अब अपने साथ ही जाएगी…

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सचिन तुम केवल खिलाड़ी नहीं इमोशन थे, जिससे मोहल्ले का हर बच्चा, चचा, ताऊ खुद को कनेक्ट कर सकता था, एक पूरी पीढ़ी को क्रिकेट का कीड़ा बना डालने में तुम्हारी बैटिंग का जितना योगदान रहा उतना शायद किसी चीज़ का ना रहा हो. तुम्हारी तरह हम किसी शोएब या वार्न को धो तो सकते नहीं थे इसलिए मोहल्ले के ही किसी लौंडे को शोएब या वार्न समझ लेते थे, बैट के अभाव में कई बार टूटी हुई खटिया की पाटी भी बैट का काम कर जाती थी. हर आँगन  सिडनी और वानखेड़े बन जाता था. कई बार स्टाइलिश दिखने के चक्कर में पॉलिथीन के ग्लब्स भी पहनने पड़े… ट्रम्प कार्ड गेम में भी तुम्हारी शकल वाला पत्ता सबसे ज्यादा वांटेड रहा..  “He has timed that beautifully… that’s been driven handsomely straight back past the bowler for four…… That’s a fierce square cut” इन चीज़ों के चक्कर में बचपन कुछ ज्यादा ही स्ट्रेच हो गया सचिन.. आज फिर नॉस्टैल्जिया में पहुंचे हुए हैं… 

Wishing a very happy birthday to one of the greatest ever batsmen to have blessed the game of cricket….  Sachin Ramesh Tendulkar.

#ThankYouMaster

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